।। चार धाम यात्रा ।।
।। यमनोत्री, गंगोत्री, श्री केदारनाथ, श्री बद्रीनाथ ।।
बहूनि सनित तीर्थानि, दिविभूमि रसासु च।
बद्री-केदार सदृशं तीर्थ न भूतो न भविष्यति।।
नगाधिराज हिमालय के नेपाल, कूर्मोचल, केदार, जलन्धर, कश्मीर, इन पांचो खण्डों मे केदारखण्ड को ही वेद, पुराण आदि प्राचीन ग्रन्थो मे मूर्धन्य स्थान प्राप्त हुआ है। ऋग्वेद में इस स्थान को योनिदेवकृतम कहा गया है। सदैव हिम से आच्छादितरहने वाली हिमालय की उत्तुंग चोटियां नन्दादेवी, त्रिशूल, कामेट, चौखम्बा, दूनगिरि, नीलकण्ठ, सतोपन्थ केदार नारायण, गंगोत्री भारत खूंट आदि इसी क्षेत्र में हैं।
यमनोत्री - भारत की पवित्र नदी यमुना का यह उदगम स्थली समुद्र से 3235 मीटर पर सिथत हैं। यह उत्तराखण्ड के चार धामों में एक धाम हैं। यहां यमुना जी का मंदिर व एक तप्त कुण्ड हैं।
गंगोत्री - पतितपावनी गंगा का यह उदगम स्थान विदित हैं। यह स्थान समुद्र से 3200 मी. पर सिथत हैं। यहां
माँ गंगा का एक अति भव्य मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थत हैं। घने चीड़ व देवदार के वृक्षों से घीरा हुआ यह गंगोत्री नगर एक आक्रर्षक पर्यटक स्थल भी हैं।
गौमुख - यह भागीरथी नदी का उदगम स्थान हैं। राजा भगीरथ ने अपने अथाह प्रयत्न व तप से मां गंगा को प्रसन्न कर इस आर्यावर्त में अवतरीत किया।
श्री केदारनाथ धाम - द्वादश ज्योर्तिलिंगों मे ग्यारहवे ज्योर्तिलिंग के रुप में श्री केदारनाथ जी विख्यात हैं। भगवान शिव का आदिनिवास हिमालय में केदारनाथ ही हैं। भगवान शिव के दर्शनमात्र से ही मनोवांछित फल की प्रापित होती है। मान्यता हैं कि पाण्डवों ने ही सर्वप्रथम इस
मंदिर का निर्माण किया। तदनन्तर जगतगुरु शंकराचार्य जी ने पूजा व्यवस्था कर उत्तराखण्ड के समस्त
मंदिरो का गौरव बढाया।
पंच केदार - केदार खण्ड मे पंच केदार के नाम से प्रसिद्व निम्न स्थान हैं -
श्री केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, श्री रुद्रनाथ व कल्पेश्वर।
|
 |
उखीमठ - पंच केदार का प्रधान पीठासन। कालीमठ - सिद्ध-साधकों का सिद्धस्थल हिमालय
केदारधाम शिवशक्ति के अनेक रुपों से पूर्ण हैं।
त्रियुगीनारायण - यह तीर्थ अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु की उपसिथति में इस स्थान पर शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। यह स्थान यज्ञ नामक पर्वत के मूल भाग में सिथत हैं। यहां पर नारायण का अति प्राचीन मनिदर हैं। इसमें अखण्ड ज्योति तथा तीन युग से जलती हुर्ड धूनी अगिन हैं।
 |
श्री बद्रीनाथ - भारत वर्ष के चार धामों में से एक श्री बद्रीनाथ प्रमुख तीर्थ स्थान हैं। यह समुद्र तल से 3,133 मी पर नर व नारायण पर्वतों के मध्य सिथत हैं। श्री बद्रीनाथ धाम के पृष्ट में नीलकंठ पर्वत अत्यंत मनोहारी दिखार्इ पडता हैं। पुरातन काल में यहां बद्री वन था व तदपश्यात इस स्थान का नाम बद्री धाम पडा। व्यास मुनि जब यहां रहे थे तब उन्हे बाद्रायण के नाम से ही जाना जाता था।
माना - यह वर्तमान भारत का सीमान्त गांव हैं। यहां व्यास गुफा, गणेश गुफा, वसुधारा आदि स्थान देखने योग्य हैं।
|
ओली - यह जोशीमठ से निकट एक शीतकालीन खेल स्थली हैं। यह पर्यटकों में प्रसिद्ध स्थान हैं।
यात्रा कार्यक्रम
दिल्ली - यमनोत्री - गंगोत्री - केदारनाथ - बद्रीनाथ यात्रा
हरसिल, उत्तरकाशी, त्रियुगीनारायण, उखीमठ, जोशीमठ, माना, ओली, हरिद्वार व ऋषिकेश के साथ।
यात्रा समय - 15 दिन
यात्रा व्यय के लिये कृपया संपर्क करें। होटल के कमरे, कार द्वारा यात्रा व गार्इड। भोजन व्यय अतिरिक्त।