वैदिक रक्षा संस्थान

मंहिष्ठो वृत्रहन्तमः
हम भारत की संस्कृतिक व प्राचिन सामाजिक आचार विचारों कों पुनः स्थापित करने में प्रयत्नशिल संस्था हैं। हम किसी धर्म या जाति विशेष के पक्ष मे कार्य नहीं करते। हमारे मत मे संस्कृति ही स्वयम मे एक पूर्ण धर्म हैं। देश मे रहने वालों कि परमेश्वरीय आस्था व नाम उदबोधन भिन्न हो सकता हो पर संस्कृति एक ही होनी चाहिये।

हमारे विचार मे आज के युग मे आधुनिकरण के नाम पर पाश्चातिकरण का इतना प्रभाव होगया है कि हम भारत मे ही रहकर इसकी विशिष्ठ जलवायु व भूमि के उपयुक्त प्राचीन आचार व विचार के अनुकूल नहीं रह रहें हैं। इसके परिणाम स्वरूप हमारे भारतवासियों व इस धरा के सामाजिक गौरव का स्वास्थ्य क्षीण होते जा रहा हैं। हमारे विचार में भारत की प्राचीन संस्कृति आधुनिक ही हैं व हमारा परम लक्ष यह है कि भारत की प्राचीन संस्कृति आचार विचार व सामाजिक व्यवस्था का पुनः उत्थान हो। हम भारत की प्राचीन संस्कृतिक प्रणालीयों का वर्तमान काल के योग्य अनुरूपण कर सफल प्रयोगों के माध्यम से समाज को नवचेतन करने में कार्यरत हैं।

हमारा प्रयत्न है कि हम भारत को वर्षो के संस्कृतिक दासत्व से मुक्त कराने के महा यज्ञ मे हर भारतीय को अपना अपना योगदान देने के लिये प्रेरित करें एवम इस यज्ञ को सफल बनायें।
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