नीति मंत्र

हम चाणक्य नीति के मंत्रो के सरल अर्थो का संकलन आपके उपयोग के लिये कर रहें है। हमें विशवास है कि, आप इसका पूर्ण रूप से उपयोग कर अपने जीवन मे सफल होवें।

।। 1 ।।

।। जहां सहृदर्इ धनी, वैदिक ब्राम्हण, न्याय प्रिय राजा, निर्मल नदी और गुणी वैध - ये पांच न हों, वहां एक दिन भी रहना नहीं चाहिए। अर्थात इनके रहने पर वह स्थान भी स्वर्ग तुल्य हो जाता हैं ।।

।। 2 ।।

।। जहां जीविका, भय, लज्जा, चतुरार्इ और कुछ न कुछ त्याग करने की लगन - ये पांच न हों, वहां के लोगों के साथ न रहें ।।

।। 3 ।।

।। जिस देश में आदर नहीं, जीविका नहीं, परिवार नहीं और विधा की प्रापित भी नहीं, वहां बसना नहीं चाहिए ।।

।। 4 ।।

।। नौकरों को कहीं भेजने पर, भार्इ-बन्धुओं को संकट के समय, दोस्त को विपतित आने पर और स्त्री को धन का नाश होने पर पहिचानना चाहिए ।।

।। 5 ।।

।। बीमारी में, विपतितकाल में, अकाल के समय, दुश्मनों से दुःख आने पर, राजद्वार में और श्मशान पर जो साथ दे, वही भार्इ-बन्धु है ।।


वैदिक शास्त्र के प्रचार मे सर्मपित।

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